शनिवार, 4 अगस्त 2012

खबरों को तरस रहे है ख़बरिया चैनल




टी0वी0 के मनोरंजन चैनलों पर बरसों से चल रहे सास बहू के झगड़े ,कहीं फिल्मी धुनों के आधार पर संगीत की प्रतिभाओं की खेज़ करते कार्यक्रम, कहीं रामायण और कहीं महाभारत या फिर घिसे पिटे फूहड़ चुटकुले सुनाते सुनाते स्वंय भी घिस पिट चुके एक दर्शक ने जब देश दिुनिया के हाल चाल जानने के लिए एक ख़बरिया चैनल का बटन दबाया तो वहां भी राजू श्रीवास्तव का चेहरा झांक रहा था। दर्शक महोदय अब दूसरे न्यूज चैनल पर पहुचे। खबर के लिए हर कीमत अदा करने का दावा करने वाले इस चैनल पर भीर किसी खबर की जगह कोर्इ भगवान पधारे हुए थे। खबर की तलाश  में भटकते इस दर्शक ने अब एक और चैनल का रूख किया। लेकिन यहां भी उसे निराशा हाथ लगी। यहां एंकर महोदय श्ऱ़द्धा के सागर में डूबे हुए अपने दर्शकों को श्रीलंका के उन स्थानों के दर्शन करा रहे थे जिनका वर्णन रामरित मानस में किया गया है। एक दृश्य में वह स्थान बताया जा रहा था जहां श्री हनुमान सीता माता की खोज करते हुए समुद्र पार कर सबसे पहले पहुंचे थे। अगले ही पल एंकर महोदय गर्व से कह रहे थे कि यह अशोक वाटिका का वह स्थान है जहां रावण ने सीता माता को बन्दी बना कर रखा था। खबर देखने के लिए उत्सुक टी0 वी0 के यह दर्शक महोदय अब तक झल्ला चुके थे। उनको खबरिया चैनलों का यह रवैया बिल्कुल समझ नहीं आया। हार कर उन्होने टी0 वी0 का सिवच आफ कर दिया औैर सुबह का बासी अखबार एक बार और दोहराने बैठ गए।
खबरों की दुनिया में दिलचस्पी रखने वाले दर्शकों सेअब यह छिपा नहीं है कि देश के सबसे लोकप्रिय न्यूज़ चैनल होने का दावा करने वालों के पास भी हर दिन इतनी संख्या में समाचार नही  होते जिन्हें वे पूरे दिन अपने दर्शकों को लगातार दिखा सकें। देश के विभिन्न शहरों और कस्बों में फैले उनके तथकथित तेज तर्रार रिपोर्टर पूरे दिन में इतनी खबरें भी नहीं बटोर पाते जिनसे दर्शक कुछ नयापन महसूस कर सकें। साधारण मारपीट, वाहनो  की टक्कर, आग लगने और बुझाने के दृश्यों को लाइव खबर के नाम पर चीख-चीख कर बताने वाले इन चैनलों के कर्ताधर्ताओं को इतना भी पता नहीं होता कि वास्तव में ऐसे समाचारों को अगले दिन के अखबारों में सिंगिल कालम जगह भी मुशिकल से नसीब होती है। इसीलिए यह इनकी मजबूरी भी है कि एक चैनल दिन रात सार्इ बाबा के प्रताप बखान करता रहता है। उससे कुछ फुर्सत पाता है तो किसी पेड़ में गणेश भगवान की आकृति दिखाता है अथवा किसी पपीते में भगवान विष्णु के दर्शन कराता है। खबरें अन्य चैनलों के पास भी नहीं है। इसलिए वे भी ऐसे ही टोटके अपनाते रहते है।
न्यूज़ चैनलों के कामकाज से जुड़े कुछ प्रभारी स्तर के लोग साफ मानते भी हैं कि इतनी खबरें हमारे लिए जुटाना सम्भव नहीं होता जिनसे हर बुलेटिन में कुछ नयापन दिखार्इ दे। इसीलिए हर खबर लागातार कर्इ- कर्इ बुलेटिनों में दोहराना आवश्यक होता है लेकिन इतने से भी जब काम नही। चला तब हर चैनल ने अपना- अपना प्रबन्ध किया । किसी ने मनोरंजन चैनलों से हास्य व्यंग के बरसों पुराने कार्यक्रमों के टुकड़े उधार ले लिए।प्रयोग चल निकला तो राजू श्रीवास्तव, सुनील पाल, भगवन्तमान और उ उनके जैसे सभी दिूषकों को हर न्यूज चैनल पर फुटेज मिलने लगी। लेकिन अभी भी बहुत बड़े बड़े स्लाट खाली थे, जिन्हे भरने के लिए हिन्दी फिल्मों के दृश्यों और गानों पर आधारित कार्यक्रम तैयार किए गए किसी ने फिल्म अभिनेता और अभिनेत्रियों के निजी जीवन से जुड़ी खबरें दिखाना शुरू कर दिया और उसके बाद लगभग सभी चैनलों ने देश विदेश के विभिन्न धार्मिक स्थानों को दिखाने के साथ दर्शकों की धार्मिक भवनाओ का दोहन आरम्भ कर दिया।
आम दर्शक खबर देखना चाहता है। इस उददेश्य के लिए वह एक के बाद दूसरा चैनल बदलता है मगर दसे निराशा ही हाथ लगती है। खबर के नाम पर उसे जो कुछ देखने को मिल रहा है वह खबर के अलावा और सब कुछ है। एक प्रतिषिठत सवैक्षण संस्थान द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार भरतीय दर्शक अपने न्यूज चैनल पर विशुद्ध खबरें देखने को ही प्राथमिकता देता है और इस बीच उसे हास्य अथवा फिल्मों पर आधारित कार्यक्रम  देखना कतर्इ गवारा नही है। लेकिन चैनलों को इसकी परवाह शायद बेहद कम है। इसीलिए इन पर अब भी खबरों की संख्या और घट रही है तथा बचा हुआ समय उलजलूल कार्यक्रमों के सहारे काटा जा रहा है। उपर से इनका एक तुर्रा और भी है। कहा जा रहा है कि यह सब दिखाना मजबूरी है क्योंकि उनके दर्शकों को यही पसन्द आ रहा है। सीधा सा अर्थ यही है कि दर्शक मूर्ख है। लेकिन इन्हें नहीं मालूम कि जनता कभी मूर्ख नहीं होती मौका पाते ही वह दूध का दूध और पानी का पानी कर देती है और उसके निर्णय में कभी गलती की गुंजाइश भी नहीं होती। बड़े बड़े निरंकुश तानाशाहों और घमंडी नेताओं को जनता समय आने पर उनकी औकात दिखा चुकी है। धराधर  बन्द होतें न्यूज चैनलों को देखकर बाकियों को सबक लेने की जरूरत है एक बार विश्वसनीयता भंग होने के बाद किसी भी न्यूज़ चैनल को अपना असितत्व बनाए रखना असंभव ही होगा। न्यूज़ चैनलों के पास अब भी स्वय को खबरों की दुनिया तक समेट लेने का समय है।
प्रस्तुति-    जय सिंह 
9450437630

शनिवार, 28 जुलाई 2012

सत्ता का नशा

 समाज में कई  प्रकार का नशा है। हर नशा अपने आप में बहुत खास  होता है, जैसे की देश को सुधारने का नशा। आज हर कोई देश को सुधारने की बात करता है, जैसे वह देश सुधारने के लिए पैदा ही हुआ है। मगर खुद सुधरने को कोई तैयार नहीं है।  काम करने का नशा-  की इनके काम करने से ही देश चलेगा। खाकी  वर्दी का नशा- यह खौफ पैदा करने के लिए जरुरी है , यह नशा जब चढ़ता है तो उतरता बड़ी मुश्किल से है, जब तक की मोटी  कमाई  न कर ले या किसी को फर्जी रूप से फँसा  न ले। धन कुबेर होने का नशा- जब यह नशा परवान चढ़ता है तो तो फिर व्यक्ति ताजमहल और टैतेनिक तक को खरीदने का ख्वाब देखने लगता है। जबकि यह सच्चाई है की वह निस्वार्थ भाव से धन खर्च नहीं करना चाहता है। प्रेम का नशा- इस जूनून में न जाने कितने आशिक अपने आप को बर्बाद कर डाले, न जाने कितनी सियासते बदल गई। समाज सेवा का नशा- जो दिल की गहराई  से नहीं बल्कि ज्यादातर लोगों द्वारा नाम चमकाने के लिए किया जाता है ।दारू का नशा, भांग का नशा, चरस, अफीम का नशा, शुर्ती, बीड़ी का नशा और न जाने इतने सारे नशों  के बीच  में सत्ता का नशा।  और अब हम बात कर रहे है इसी नशे की यानी  सत्ता का नशा। ''सत्ता'' नाम में ही कुछ ऐसा है, जिसे सुनकर ही कुछ -कुछ होने लगता है , चाल में कड़क आ जाती है, आवाज में खनक आ जाती है, और दिमाग में एक अलग तरह का सुरूर चढ़ने लगता है ।
यह सच है की दुनिया का सबसे बड़ा नशा सत्ता में होता है। इसके सामने सारे नशे  फीके है। शराब का नशा शराब पीने के बाद शुरू होता है। पीते ही नशा चढ़ने लगता है और आदमी कुछ  देर तक आय-बाय-साय और न जाने क्या-क्या बडबडाने लगता है। और कुछ ही पल के बाद नशा उतर जाने के बाद व्यक्ति को अपने द्वारा किये गये कृत्य याद ही नहीं रहता  है। भाँग का नशा भी पीने के बाद ही सुरु होता है। शराब की वैरैटिया भी बहुत किस्म की है। किसी का नशा बहुत होता है तो किसी का बहुत कम। कोई भी शराब कितनी भी स्ट्रोंग क्यों न हो, बोतल या गिलास पकड़ने से नशा कभी नहीं करती, जब तक शराब गले में नीचे नहीं उतरती, तब का कोई असर नहीं दिखाती है। ऐसे ही कई प्रकार के नशे पाउचों में या पुडियों में  होती है। हिरोइन हो या चरस ये भी जब तक गले के नीचे  नहीं जाती अपना असर नहीं दिखाती है। किन्तु ये सब नशे सत्ता मद की नशे के आगे बेकार ही है, क्योकि  सत्ता का नशा की बात ही कुछ निराली है।  हवा में थोडा सा सत्ता का गंध आते ही अपना असर दिखाना सुरु कर देती है।
पुरानी  कहावत भी है -
कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय ।
या खावै बौराय जग,वा  पावै बौराय ।।
सत्ता का नशा कोई आज का नया नशा नहीं है बल्कि प्राचीन काल से चला आ रहा है। सत्ता के नशे का तो इतिहास गवाह है कि इस सत्ता के नशे ने न जाने कितने लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। शाहजहाँ ने भी मजदूरों के हाथ कटवाकर बेकार कर दिया। सत्ता के मद में न  जाने कितने जानवरों के सिर काटे गए ,कितने आखेटो के शिकार हुए , कितने इन्सान मारे गए, कितनो की बलि चढ़ाई गई । इतिहास गवाह है की सत्ता को बनाये रखने के लिए समय-समय पर युद्ध होते रहे है। चाहे वह वाक युद्ध ही क्यों न हो। दूसरों को भूखा देखने का नशा अपने आप को बड़ा ही सुकून देता है। दुसरे की थाली की रोटी मुझे ही चाहिए भले ही ओ फेकनी ही क्यों न पड़े । ताकत का नशा भी बड़ा सुकून देने वाला होता है।छीनने में अपनी ताकत का एहसास होता है। इस तरह के लोगों का सबसे बड़ा दुःख यह नहीं की वह अपने दुःख से दुखी है। बल्कि सबसे बड़ा दुख यह है की दूसरा सुखी क्यों है।
सत्ता का नशा भी कुछ इस प्रकार है। जिसके पास सत्ता है वह उसका प्रयोग करेगा ही। चाहे वह करे या सही। जैसे आजकल उत्तर प्रदेश में अखिलेश की सत्ता का नशा भी ऐसा ही कुछ है जो आजकल अपने पावर का उपयोग जिलों के नाम बदलने एवं फर्जी जाँच में लगा रहे है। सत्ता के नशे में आकर गलत निर्णय लेकर सरकार  को भी बदनाम कर रहे है। सत्ता के  बाहर थे तब न जाने कितने वादे किये जनता से परन्तु वे सारे वादे अब झूठी साबित हो रहे है। बेरोजगारी भत्ता, लैपटॉप , रिक्शा न जाने कितने ऐसे वादे किये थे। सत्ता में आते ही सब  बेकार लगने लगा है।
सत्ता का नशा इतना चढ़ गया है की जनता को किये गए वादों को भुलाकर     पार्को, स्मारकों तथा चौराहों पे  मूर्तियों की तोड़-फोड़ में लगे हुए है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की मूर्ति को तोड़ना सत्ता का नशा ही है।
जिसके पास सत्ता है, वह उसका प्रयोग करेगा ही और सच्चाई भी यही है।चाहे वह उसका प्रयोग अच्छाई के लिए करे या बुराई के लिए। सुख प्राप्त करने के लिए दुसरे का गला क्यों न घोटा जाय। अपने से कमजोर लोगो को दुःख पहुचाकर ही इन लोगो को सुख मिलता है। जबकि कबीर दास जी ने भी कहा था-
दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय।
 मरी  खाल की साँस से, लौह भस्म हो जाय।।
 कुर्सी पर विराजमान लोग यही तो करते है। अपने अधिकारों का दुरूपयोग और है। और इसमें कुर्सी पर बैठे लोगों को बड़ी ही तसल्ली,संतुष्टि ,शान्ति  और राहत मिलती है। जब सत्तासीन व्यक्ति सत्ता विहीन व्यक्ति को दीन और निरीह हालात में देखता है तब, उसे बड़ी आनंद की प्राप्ति होती है। कुछ सुख ऐसे होते है, जो  पैसे के बल पर नहीं ख़रीदे जा सकते है और न ही इन सुखों को प्रत्येक व्यक्ति भोग सकता  है, क्योकि प्रत्येक व्यक्ति की मानसिकता एक सी नहीं होती है। ऐसा नहीं की सत्ता का नशा उतरता नहीं। जैसे शराब का नशा उतरता है वैसे ही सत्ता का नशा भी उतरता है। जिस प्रकार शराब का नशा उतरने के साथ ही अनिद्रा, सिर दर्द , चिडचिडापन ,थकान का उपहार देकर जाता है, उसी प्रकार जब सत्ता का नशा उतरता है तो चिडचिडापन, डिप्रेशन, पागलपन जैसी बीमारी देकर जाता है, क्योकि जो चमचा वर्ग स्वार्थ के लिए कुर्सी से चिपका रहता था, वह सत्ता के जाते ही दूर छिटक जाता है। वह अब नये आने वाले की चमचागिरी शुरू कर देता है। 
आज भी समाज में आपको ऐसे नेता, अभिनेता, प्रशासनिक वर्ग इत्यादि लोग मिल जायेगे, जब तक वे सत्ता में रहे, अपनो से कटे रहे, अब अपने उनसे कटे हुए है। इसलिए अच्छा है की व्यक्ति समय रहते ही संभल जाय।अहंकार से दूर रहे और शुरू से ही अच्छा व्यक्ति बने रहने का प्रयास करे । स्वार्थी और चमचा टाईप के लोगो से दूर रहे, तभी उनकी सोच स्वस्थ रहेगी ।और तभी बनेगा उत्तम प्रदेश और देश ।


                                                                          आपका- जय सिंह 
                                                                                9450434630

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

गोवा में मानसून की रोमांस यात्रा


गोवा में मानसून की रोमांस यात्रा
हाथों में एक प्यारा सा हाथ हो और धीमी-धीमी बरसात हो तो यकीनन मौसम का मजा दोगुना हो जाता है। ऐसे में अगर समुद्र का किनारा या ढे़र सारी हरियाली मिल जाए तो कहना ही क्या । इस मानसून में आप अपने साथी के साथ किसी प्यारी सी जगह की सैर पर निकल जाए। गोवा की पहाडि़यों से लेकर समुद्र के बीच तक।



बरसता पानी और गोंवा की कहानी जय सिंह की जुबानी
सर्दियों में गोवा जाएं तो भीड़ इतनी हो जाती है कि सारा मजा किरकिरा हो जाता है। गर्मियों में वहां जाने का कोर्इ मजा नही, लेकिन मानसून का आनंद ही अलग है। मडगांव से पणजी का हरियाली भरा रास्ता बारिश की फुहारों में तय करना बहुत ही रामांचकारी और खूबसूरती से भरा माहौल में बहूत ही मजा आता है। बस भीगने से बचने के लिए एक छाता हो यदि बारिश के फुहारों मे यात्रा करें तो और ही मस्ती करने में मजा आयेंगा।


मौज मस्ती के लिए
धुली-धुली सड़कें जहां तक नजर जाए वहां तक फैली हरियाली। शांत माहौल। आकाश में पल-पल रंग बदलते बादल और उनके साथ ताल मिलाती अरब सागर की लहरें  गोंवा के ये सारे नजारे केवल मानसून में मिलेंगे। गोवा की पहचान यूं तो अपने समुद्र तट से है और उसका भौगोलिक फैलाव भी समुद्र के किनारे ही है लेकिन उसका काफी भीतरी हिस्सा कर्नाटक की पहाडि़यों की तरफ भी जाता है। वहां आपको मैदान, नदियां, झरने, व जंगल के अलावा और भी बहुत कुछ मिलेगा।  खालिस यायावरी की सलाह दी जाए तो मानसूनी फिजा में मोटरसाइकिल या स्कूटर किराए पर लेकर आप बागा, अंजुना, कलुंगटे, माजोर्दा, कोलवा, वार्का, कोला, कान्डोलिम, आदि बीचो की सेैर कर सकते है। पुराने गोवा की बात ही कुछ और है। गोवा की सैर ओल्ड गोवा, जिसे यहां वेल्हा गोवा कहा जाता है के बिना पूरी नहीं होती। ओल्ड गोवा में प्राचीन  चर्च का कर्इ पुरानी इमारत सिथत है जो कि वहां पर शानित का वातावरण पैदा करते है। पुर्तगाली छाप वाले खूबसूरत चर्च और भव्य मंदिर यहीं पर है। पणजी में ही बारिश में मीरामार या डोना-पोला बीच पर सैर करने का अलग आनंद है। मंडोवी नदी पर शाम छोटे स्टीमर और क्रूज भी चलते है। जो घंटे भर में नदी से निकलकर थोडी दूर समुद्र की सैर करा देते है। उपरी डेक पर गोवा के संगीत व नृत्य का मजा मिलता रहता है। इसी क्रूज पर आप अपने साथी के साथ भरपुर इन्ज्वाय कर सकते हैं। इस पर डान्स, गाना, और खाने-पीने की सभी वस्तुए उपलब्ध होती है।


 आप चाहें तो ऐसे स्टीमर किराए पर लेकर समुद्र में थोडी दूर कुछ अन्य द्वीपों को घूमने या डालिफन देखने भी जा सकते है। पहाड़ी रास्तों एवं उसके यात्रा का मजा लेना हो तो मडगांव से कावो दे रामा फोर्ट जाएं और यात्रा का रोमांचक और उत्साहित यात्रा करने में बहुत मजा आता है। जब बस पहाडियों पर चढ़ती उतरती है तो क्या मजा आता है। कभी कभी तो बहुत डर लगता है कि कहीं बस खार्इ में ना चली जाए। गोवा में खरीददारी करनी हो तो मापुसा मार्केट में जाएं जो शुक्रवार को लगता है। इसमें सभी कपडे़ किचन और लार्इफस्टाइल से सम्बनिधत सभी समान मिल जायेगें। गोवा में पीने के लिए पानी तो आसानी से नही मिल पाता है परन्तु वहां वार्इन और वीयर बहुत आसानी से और सस्ते दाम पर उपलब्ध है। वहां के हर चौराहे या बाजार में सबसे अधिक दूकान वीयर की ही दिखार्इ देती है। वैसे तो पर्यटक वहां जाते है घुमने के लिए परन्तु खरीददारी भी खुब करते है। वहां पर काजू और बादाम बड़ी मात्रा में सस्ते दर पर मिल जाती है।
वैसे तो गोवा में पर्यटक घुमने जाते है तो अधिकतर बीच और समुद्र में आनंद लेते है परन्तु इसके अलावा वहां पर बहुत से और देखने और घुमने की जगह है जो अपने आप में बहुत ही रोमांचकारी और यादगार जगह है जैसे- ओल्ड गोवा में बासीलिका आंफ बोम जीसस चर्च, टावर आफ संत अगस्टार्इन चर्च, और गोवा में अगुआडा फोर्ट, लार्इट हाउस, चापोरा फोर्ट, तेरेखोल फोर्ट, हेरीटेज हाउस-चन्दर, अर्वालेन गुफा, बबल पोन्ड, संता दुर्ग पोन्डा, आदि जगह यादगार यात्रा बना देती है। गोवा में यदि घुमने जाएं तो इन सभी को जरूर देखे तभी गोवा की सैर करने का मजा आयेगा।


आपका- जय सिंह
डा0 भीमराव अम्बेडकर पी0जी0 छात्रावास
हजरतगंज, लखनऊ -226001
मोबार्इल न0- 9450437630

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

निर्मल नरूला की बाजीगरी


“‘बाज़ीगर संसार कबीरा”, निर्मल नरूला बाजीगरी दिखा रहा है  34 लाख का कलेक्शन भी कम नहीं होता इस इंटरव्यू मे क्या हे? ‘शक्तिया’, किस की शक्ति? वह केवल हिन्दू लोगो को देवीदेवताओ की ढोंग पुजा करवाता है कौन सा मंदिर बनवाएगा निर्मल नरूला ? कौन हे उसका भगवान ? भगवान के मंदिरो की कमी है क्या इस देश मे? अगरशक्तियावास्तव मे होती इन मंदिरो मे तो फिर यह देश 5000 साल तक गुलाम क्यो रहता ? सोमनाथ मंदिर टूटा , क्या उखाड़ लिया शिवजी ने मोहम्मद गजनवी का ? किस शक्ति ने क्या मदद की इस देश की ? किसी की पुजा में कोई भी दोष निकाल कर भी गुमराह किया जाता है गावों मे आज भी झाड फुक वाला निर्मल नरूला की ही भाषा बोलता है फलां देवता के पास फलां-फलां पूजा क्यो नहीं की ! देवता नाराज़ है, जावों फलां-फलां पूजा दो, काम हो जाएगा निर्मल नरूला झारखंड मे आदिवासी बेगा लोगो का फॉर्मूला सीख कर फाइव स्टार मजमा लगा कर चुना लगा रहा है वास्तव मेईश्वर कुचक्री लोगों का इजाद किया हुआ फार्मूला है और धर्म बदमासो का आडंबर है संसार  के म्यूज़ियमो मे 6340 देवताओ की टूटी-फूटी मूर्तियो का संगृह पड़ा हुआ है, कभी उनकी पूजा होती थी, नरबली होती थी, मेला लगता था, आज बेकार हे, कहाँ गयी उनकी शक्ति? देवता, भगवान, अल्लाह यह सब मगज का बहम है और यह बहम सदियो से बर्बाद कर रहा हे इंसानियत को सब अटकलबाज़ी है सारी फसाद की जड़ गोड (God) ही है कभी चंद्रा स्वामी भी बाजीगरी दिखाता था, आज कोर्ट के चक्कर लगा रहा है निर्मल नरूला कीथर्ड आइनहीं यहभ्रस्त आइ’ है धुर्त विध्या हे और वो एक्सपेर्ट हो चुका है डाकू मचाये शोर, उसका इंटरव्यू वेल प्रीपेर्ड है, उसका पूरा गिरोह अपना बिज़नस खराब होता देख रहा है चालबाज़ आशिक बावली रांड को जाल मे फसाये रखता हे और निर्मल नरूला भी अपने बावलेलालची, मूर्ख लोगो को जाल मे फसाए रखेगा हिंदुस्तान मे जो जितना घटिया, वो उतना ही पुजयनीय होता है नरूला की कमाई बढ़ती जाएगी पट्ट-पट्टी साई बाबा 450000 करोड़ की प्रॉपर्टि छोड़ कर मरा धर्म अफीम है और पिछलग्गू अफीमची है, कुछ लोग जन्म से ही पिछलग्गू होते हे बस उनको बाबा/ज्योतिषी लोग मिल जाते है और उनको संतोष मिल जाता है, एक मानसिक उन्माद खतम हो जाता है, एक मानसिक शरण मिल जाती हे डरपोक, लालची, बेईमान ही सबसे ज्यादा धार्मिक होता हे वो ही ज्योतिषियो की तरफ जाता हे ईमानदार को कोई गोड्ड /भगवान/अल्लाह /ज्योतिष की जरूरत नहीं होती
बाबा के नाम पर करोड़ लोग धोखे का शिकार हुए कोई नई बात नहीं, नेता लोग सालो से धोखा दे रहे है, एक धोखा निर्मल बाबा ने और दे दिया। नेता लोग वोट के बदले किरपा का वादा करते है, बाबा नोट के बदले किरपा का वादा करते है .... नेता ठेकेदार से commision  लेते है और निर्मल बाबा भक्तो से ही १० % ( दसवंत किरपा बनाये रखने के लिए) ले लेते है। भोले-भाले धार्मिक लोग जो बीमारी से, पैसे से, सांसारिक परेशानी से दुखी होते है, सोचते है २००० रूपए और सही, बाबा सारे चैनल पर आते है, कितने लोगो का काम बन जाता हैऔर चले जाते है निर्मल दरबार.आज तक, को दिए साक्षात्कार में बाबा मानते है, की उनके वहां अध्यात्मिक फिक्सिंग हुआ करती थी जिसमे १०,००० रूपये प्रश्न पूछने वाले को, और जय जय कार करने वाले को दिए जाते थे . लेकिन बाद में बाबा ने फिक्सिंग को बंद करा दिया.न्यूज़ चैनल जब कोई ज्योतिष,शेयर बाज़ार एक्सपर्ट, या कुक को अपने चैनल पर दिखाते है तो देश भर के दर्शक मानते है की यह लोग अपने काम में अच्हे होंगे, और उन्हें ध्यान से सुनते है। निर्मल बाबा का समागम, किरपा का कारोबार ३५ चैनल ने दिखा कर बाबा की शक्ति को अप्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित कर दिया। पैसा भगवान के नाम पर धोखा देकर लिया गया थाइसलिए सरकार को सारा पैसा लेकर भारत में नए School and Hospital का निर्माण करना चाहिए। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी है की सभी न्यूज़ चैनल को आदेश जारी करे की निर्मल बाबा जैसे समागम का प्रसारण तत्काल बंद करे और भविष्य में ऐसे धोखाधड़ी वाले विज्ञापन , प्रसारण राष्ट्र हित में कभी ले। राष्ट्रीय चैनल की जिम्मेदारी राष्ट्र के प्रति ज्यादा होनी चाहिए की प्रसारण का पैसा देने वाले निर्मल बाबा के लिए।
 कहावत हैअति भक्ति च्*** का लक्सनअगर कोई बाबा गाँव के बाहर जियादा हीहरीनामकी भक्ति कर रहा है तो समझो गाँव की कोई रांड (विधवा) को लेकर भागेगा चिट फ़ंड कंपनी वाले, हर्षद मेहता शेय *** जियादा मुनाफा वाले वादे, जियादा ब्याज देने वाली फाइनन्स कंपनी, जियादा धार्मिक प्रवचन, भगवान का दर्शन करवाने वाले, अला बला दूर करने वाले, भूत भगाने वाले, रुके हुये काम करवाने वाले, लाइलाज बीमारी ठीक करने वाले, जियादा किराया देने वाले, सस्ता मकान बेचने वाले,औरत लोगो मे प्रेवचन करने वालेमीठा बोलेने वाले, यह सब ऊठाईगिरि करने वाले ही लोग है। याद रखो अगर कोई ज्यादा ब्याज दे रहा है तो समझो मूलधन हड़प करेगा, अगर जियादा किराया दे रहा है तो समझो मकान पे कब्जा करेगा, अगर बिना मतलब कोई छोरा आंटी का काम कर रहा है तो समझो आंटी की लड़की को लेकर भागेगा बस यही निर्मल नरूला का खेल है। पाकिस्तानी पंजाबी है, इट भट्टा का कारोबार नहीं चला तो प्रॉपर्टि मे कर ली, फिर बाबा बन बेठा, शक्ति का मालिक कृपा ट्रांफर करवाता है देवतावों की ओ भी नोट लेकर पूरा देश ही पागल हो गया, सब को रुपया चाहिये और बाबा इस लालच का फायदा उठा रहे है। गवर्नमेंट कर्प्सन देखाई देता है पर धार्मिक करपसन इनको उपकार लगता है। अन्ना हज़ारे क्यो नहीं बोलता, केजरीवाल क्यो नहीं धार्मिक कर्प्सन पे चोट करता ? सन 1990 के बाद मंदिर चमत्कारी हो गए, ज्योतिषी साइंस बन गयी, कथावाचक लीडर बन गए, योगा टीचर डॉक्टर बन बईठे, मुसलमान टोपी लगा कर नमाज़ी बन गए सब तरफ धार्मिक उन्माद फ़ेल गया और उसी उन्माद का परिणाम निर्मल बाबा, राम देव बाबा, क्रपालु महाराज, मुरारी बापू, सतपाल, साई बाबा, जय गुरदेव, रितमबरा, रवि शंकर, आनदमई माँ, सुधांशु, आशाराम, मुल्ला, तालिबन, बंगाली बाबा, ज्योतिषी महाराज इत्यादि, इत्यादि है। धार्मिक उन्माद हमारी ज़िंदगी बर्बाद कर रहा है, हम लुट रहे है, फिर भी उधर ही भाग रहे है, यह पागलपन है, यह बढ़ेगा कई बाबा अभी लाइन मे है, सब मालामाल हो जाएगे कई बाबा सेक्स रकेट भी चला रहे है लोग अपनी बीबियो को बाबा दरबार मे भेज रहे है कुऍ में भाँग गिर गयी भाइयो हम क्या करे ? अब आप को सचेत रहना पड़ेगा ।

                                                                    जय  सिंह